श्रीमद्भगवद गीता में भगवान ने कहा है कि जब-2 विश्व में धर्म की ग्लानि होती है तो दुष्टों को दंड देने तथा सज्जनों की रक्षा करने के लिए मैं सृष्टि पर आता हूँ | तो सोचिए, क्या दुनिया की परिस्थिति इतनी नहीं बिगड़ी है कि भगवान् को इस धरती पर आने की आवश्यकता हो दुनिया में चारो ओर ही आग दहक रही है कहीं काम की अग्नि, तो कहीं क्रोध की अग्नि, कहीं मनुष्य प्रकृति का नाश करता आया है और कहीं प्रकृति मनुष्य का नाश कर रही है | क्या सृष्टि का इसी प्रकार पतन होता रहेगा ? क्या इसका परिवर्तन संभव है ?

          हाँ, संभव है किन्तु पतित मनुष्यों द्वारा नहीं अपितु पतित-पावन सदा कल्याणकारी परमपिता परमात्मा शिव भगवान् द्वारा, जो कि नर्क को स्वर्ग बनाने के लिए भारत भूमि पर दिव्य जन्म ले चुके है ओर सन 1936/37 से इस विश्व परिवर्तन का कार्य एक साधारण मनुष्य तन में प्रवेश कर गुप्त रूप से सहज राजयोग ओर ईश्वरीय ज्ञान की शिक्षा द्वारा कर रहे है नर्क को स्वर्ग बनाने का कार्य कोई भी धर्मपिता, महात्मा या पंडित मौलवी, पादरी आदि नहीं कर सके| यह कार्य सिर्फ परमपिता परमात्मा ही कर सकते है और कर भी रहे है |

श्रीमद्भगवद गीता

कम्पिला –आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

परमपिता परमात्मा शिव का इस धरती पर आने का मुख्य लक्ष्य ही यह है - विश्व धर्मों की सभी देव आत्माओं को एक सूत्र में बाँधकर प्रायः लोप हुए 'आदि सनातन देवी देवता धर्म' की स्थापना करना अर्थात मनुष्य से देवता बनाना। ' नर ऐसे कर्म करे जो नर अर्जुन से नारायण बने और नारी द्रौपदी ऐसे कर्म करे जो लक्ष्मी बने। ' इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गीता का आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग ही प्रमुख साधन हैं। इस ज्ञान का निःशुल्क एडवांस प्रशिक्षण आध्यात्मिक विश्वविद्यालय  के कम्पिला-फर्रुखाबाद/दिल्ली स्थित मधुबन द्वारा दिया जाता है तथा भारत वर्ष में फैले इसके विभिन्न अन्तर्राज्यीय आध्यात्मिक परिवारों तथा गीता पाठशालाओं द्वारा भी दिया जाता है।

आरम्भिक ज्ञान

  Murli points


गुल्जार दादी में शिवबाबा नहीं आते

  • बाबा तो बड़ी सभाओं में नहीं बैठ समझावेंगे। (मु.4.9.73 पृ.2 मध्य)
  • इतना ऊँच बाप है तो उनको तो राजा अथवा पवित्र ऋषि के तन में आना चाहिए। पवित्र होते ही हैं सन्यासी। पवित्र कन्या के तन में आवे; परन्तु कायदा नहीं है। बाप सो फिर कुमारी पर कैसे सवारी करेंगे? बाप बैठ समझाते हैं कि मैं किसमें आता हूँ। मैं तो आता ही उसमें हूँ जो कि पूरे 84 जन्म लेते हैं, एक दिन भी कम नहीं। (ब्रह्मा के तो 50 साल कम हो गए) (मु.15.10.69 पृ.2 मध्य)
  • मैं सूक्ष्मवतनवासी ब्रह्मा देवता में प्रवेश नहीं करता हूँ। मुझे तो यहाँ पतित को पावन बनाना है। मेरे द्वारा ही वो सूक्ष्मवतनवासी ब्रह्मा पावन बना है। (मु.4.11.65 पृ.1 मध्यादि)
  • लाउडस्पीकर पर कब पढ़ाई होती है क्या? टीचर सवाल कैसे पूछेंगे? लाउडस्पीकर पर रिस्पॉण्ड कैसे दे सकेंगे? इसलिए थोड़े-2 स्टूडेंट को पढ़ाते हैं। (मु.15.9.76 पृ.3 आदि)
  • ऐसे नहीं कि बाप-दादा का आवाहन कर रहे हैं। नहीं, बाबा का आवाहन तो कर ही नहीं सकते हैं। बाबा को तो आप ही आना है। (मु.12.4.71 पृ.1 आदि) मु.12.4.76 पृ.1 आदि
अधिक जानकारी के लिए प्रूफ सहित
वी. सी. डी. - 2235
वी. सी. डी. - 2236
वी. सी. डी. - 2237
वी. सी. डी. - 2238
वी. सी. डी. - 2239
वी. सी. डी. - 2240
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